बवासीर, फिशर और कब्ज का 3-चरणीय कुदरती उपचार
आयुर्वेद के अनुसार बवासीर (अर्श) का मुख्य कारण अपान वायु का दूषित होना और क्रोनिक कब्ज है, जिससे शौच के समय अत्यधिक दबाव बनता है और गुदा मार्ग की नसें फूलकर मस्सों का रूप ले लेती हैं। पाइलेक्स-टी 3-इन-1 किट समस्या के तीनों पहलुओं पर एक साथ वार करती है:
- पाइलेक्स-टी कैप्सूल (अंदरूनी सूजन और मस्सों पर नियंत्रण): नागकेसर, सूरन और खून-खराबा अंदरूनी नसों की सूजन घटाकर मस्सों को सुखाते हैं और ब्लीडिंग बंद करते हैं।
- फ्रेश ईज़ी चूर्ण (कब्ज का स्थायी खात्मा): यष्टिमधु, सनाय, सौंफ और पुदीना आंतों की गतिशीलता सुधारते हैं, जिससे मल बिल्कुल नरम होकर आसानी से निकलता है।
- पाइलेक्स ऑयल (बाहरी दर्द, जलन व घाव भरना): नीम, बादाम और काशीशादि तेल गुदा मार्ग के छिलने, जलन और असहनीय दर्द को तुरंत शांत करते हैं और फिशर के घाव भरते हैं।
किट के तीनों घटकों की संपूर्ण आयुर्वेदिक संरचना (Piles Composition)
पाइल्स केयर कॉम्बो किट में शामिल सभी शुद्ध जड़ी-बूटियों की प्रामाणिक सूची:
मस्सों का आकार सिकोड़ने व रक्तस्त्राव रोकने वाले प्रमुख घटक:
नागकेसर (Nagkeshar)
सूरन / जिमीकंद (Suran)
भृंगराज (Bhringraj)
हरीतकी (Haritki)
खून खराबा (Khoon Kharaba)
महा नीम / बकायन (Maha Neem)
त्रिफला (Triphala)
आंवला (Amla)
अजवाइन (Ajwain)
कार्य: मस्सों की रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर दर्द व ब्लीडिंग रोकता है।
आंतों को चिकनाई देने और पेट साफ रखने वाले पाचक तत्व:
यष्टिमधु / मुलेठी (Vasthimadhu)
सनाय (Sanay)
सौंफ (Saunf)
पुदीना (Pudina)
हरीतकी (Haritki)
अजवाइन (Ajwain)
सज्जीक्षार (Sajeekhar)
गुलाब (Gulab)
सोंठ (Saunth)
निशोध (Nishodh)
जीरा (Jeera)
सोडियम मिथाइल व प्रोपाइल
कार्य: बिना किसी पेट मरोड़ के मल को नरम कर पेट साफ करता है।
दर्द निवारक व घाव भरने वाले 5 विशेष आयुर्वेदिक तेल:
नीम का तेल (Neem Oil)
कलौंजी का तेल (Kalaunji Oil)
बादाम का तेल (Almond Oil)
नारियल का तेल (Coconut Oil)
काशीशादि तेल (Kashi Shadi Oil)
कार्य: तुरंत ठंडक प्रदान करता है, खुजली मिटाता है और फिशर के घाव भरता है।
पाइल्स (बवासीर) की दवा लेने का सही तरीका (सेवन विधि)
दवा का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए कृपया इस विधि का नियमपूर्वक पालन करें:
1. Pilex-T Capsule (कैप्सूल)
रात में खाना खाने के आधे घंटे बाद 1 कैप्सूल लें।
इसे हल्के गुनगुने पानी के साथ लेना है।
2. Fresh Eazy Churan (चूर्ण)
सुबह खाली पेट 1 चम्मच चूर्ण लें।
इसे हल्के गुनगुने पानी के साथ लेना है।
3. Pilex Oil (हर्बल तेल)
रात में सोने से पहले समस्या वाली जगह पर तेल लगाएं।
लगाने से पहले जगह को अच्छी तरह साफ कर लें और फिर हल्के हाथ से तेल लगाएं।
💡 खानपान सलाह: दवा के सेवन के दौरान अधिक मिर्च-मसाले, तली-भुनी चीजें, मैदा, बैंगन और मांसाहार का परहेज करें। भोजन में पपीता, छाछ, हरी सब्जियां, सलाद और प्रचुर मात्रा में पानी शामिल करें।
पथ्य और अपथ्य (आहार, दिनचर्या व परहेज)
बवासीर और फिशर के स्थायी निवारण के लिए दवाओं के साथ-साथ आंतों को आराम देने वाले आहार का पालन अत्यंत आवश्यक है:
- पपीता व फाइबर युक्त फल: पक्का पपीता, सेब, अमरूद (बीज निकालकर) और चीकू रोज खाएं।
- छाछ (मट्ठा): दोपहर के भोजन के बाद भुना जीरा और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर छाछ पिएं।
- फाइबर युक्त आहार: दलिया, ओट्स, चोकर वाली रोटी और मूंग दाल की पतली खिचड़ी।
- हरी पत्तेदार सब्जियां: लौकी, तोरई, परवल, टिंडा और कद्दू का अधिक सेवन करें।
- इसबगोल की भूसी: रात को सोने से पहले हल्के गर्म दूध या गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच लें।
- प्रचुर जलपान: दिनभर में 3 से 4 लीटर गुनगुना या सामान्य पानी अवश्य पिएं ताकि मल मुलायम रहे।
- तीखा व गर्म मसाला: लाल मिर्च, हरी मिर्च, गरम मसाला और अत्यधिक चटपटा खाना न खाएं।
- मैदा व फास्ट फूड: समोसा, कचौड़ी, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और गहरे तले-भुने पकवान।
- कब्जकारक सब्जियां: बैंगन, अरबी (घुइयां), कटहल और उड़द-चने की भारी दालें।
- नशा व उत्तेजक पदार्थ: शराब (अल्कोहल), बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और दिन में 2 कप से अधिक चाय-कॉफी।
- मांसाहार व अंडा: लाल मांस, चिकन और भारी प्रोटीन वाले आहार आंतों की जलन बढ़ाते हैं।
- गलत आदतें: शौच के समय ज्यादा जोर लगाना या टॉयलेट सीट पर देर तक बैठे रहने से बचें।
सावधानियाँ एवं आवश्यक सूचना (Precautions)
निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन न करें:
- गर्भवती महिलाएँ एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ।
- जिनकी पिछले 1 वर्ष के भीतर कोई भी छोटी या बड़ी सर्जरी हुई हो।
- टीबी (Tuberculosis) या अस्थमा (दमा) से पीड़ित व्यक्ति।
- जिन्हें मिर्गी या दौरे पड़ने की समस्या हो।
- कैंसर से पीड़ित व्यक्ति या जिनका कैंसर का इलाज चल रहा हो।
- किडनी, लिवर, हृदय या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति।
- जो पहले से किसी अन्य बीमारी की दवा ले रहे हों या जिन्हें किसी दवा अथवा घटक से एलर्जी हो।
- बच्चों, बुजुर्गों या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्ति।
महत्वपूर्ण सूचना: किसी भी आयुर्वेदिक दवा का सेवन शुरू करने से पहले उसकी सामग्री एवं सेवन विधि की जानकारी लें। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित दवाएँ ले रहे हैं या आपकी हाल ही में सर्जरी हुई है, तो पहले योग्य एवं पंजीकृत डॉक्टर से परामर्श करें। बिना डॉक्टरी सलाह के अपनी चल रही नियमित दवाएँ बंद न करें।