गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक अश्मरीभेदक चिकित्सा
गुर्दे की पथरी (Ashmari) शरीर के मेटाबॉलिज्म के असंतुलन, कम पानी पीने और कैल्शियम ऑक्सालेट व यूरिक एसिड के जमा होने से बनती है। क्रैक-ओ-स्टोन 3-इन-1 थेरेपी प्राकृतिक अश्मरीभेदन (पथरी तोड़क) और मूत्रल (डाइयुरेटिक) के रूप में कार्य करती है:
- पथरी का विघटन (Stone Dissolution): पाषाणभेद, हजरुलयहूद भस्म और कुलथी दाल पथरी के कठोर बंधन को तोड़कर उसे महीन कणों में बदल देते हैं, जिससे वह बिना दर्द के पेशाब से निकल जाती है।
- मूत्र मार्ग की सफाई (Diuretic Flushing): गोखरू और पुनर्नवा मूत्र प्रवाह को बढ़ाकर घुले हुए क्रिस्टल्स और विषैले पदार्थों को तेजी से बाहर निकालते हैं।
- दर्द व ऐंठन से तुरंत राहत (Anti-Spasmodic): यूरिनरी ट्रैक्ट की सूजन और ऐंठन को शांत करके कमर व पेट के गंभीर दर्द को खत्म करता है।
- पुनरावृत्ति से बचाव (Recurrence Prevention): मूत्र के अम्लीय स्तर (pH) को संतुलित रखता है जिससे दोबारा पथरी नहीं बनती।
किट के तीनों उत्पादों की संपूर्ण आयुर्वेदिक संरचना (Composition)
क्रैक-ओ-स्टोन किट में शामिल तीनों औषधियों की प्रामाणिक जड़ी-बूटियाँ निम्नलिखित हैं:
पथरी को आंतरिक रूप से विघटित करने और सूजन मिटाने वाले 5 शक्तिशाली तत्व:
1. गुड़हल (Gudhal)
2. पाषाणभेद (Pashanbheda)
3. गोखरू (Gokhru)
4. शुद्ध शिलाजीत (Shilajit)
5. मंजीष्ठा (Manjistha)
कार्य: स्टोन के क्रिस्टल्स को ढीला करता है और रीनल फंक्शन सुधारता है।
पाचन सुधारने, मूत्र प्रवाह तेज करने और किडनी को डिटॉक्स करने वाले 9 दुर्लभ घटक:
1. हरड़ (Harad)
2. आंवला (Amla)
3. बहेड़ा (Baheda)
4. मुलेठी (Mulethi)
5. अश्वगंधा (Ashwagandha)
6. गोखरू (Gokhru)
7. नीम (Neem)
8. इलायची (Elaichi)
9. चंदन (Chandan)
कार्य: यूरिन का फ्लो बढ़ाता है और विषैले टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।
18 शास्त्रीय आयुर्वेदिक भस्मों व जड़ी-बूटियों का महा-फॉर्मूलेशन:
1. गुड़हल फूल
2. पाषाणभेद
3. गोखरू
4. कुलथी दाल
5. वरुण छाल
6. पलाश पुष्प
7. श्वेत चंदन
8. यवक्षार
9. अपामार्ग
10. पुनर्नवा
11. हजरुलयहूद भस्म
12. मंजीष्ठा
13. ककड़ी बीज
14. शुंठी (सोंठ)
15. शुद्ध शिलाजीत
16. श्वेत पर्पटी
17. शर्करा
18. सोडियम बेंजोएट
कार्य: जलन शांत करता है और यूरिनरी ट्रैक्ट को चिकनाई देकर पथरी आसानी से निकालता है।
दवा लेने की प्रामाणिक विधि (सेवन विधि)
दवा का सर्वोत्तम और त्वरित परिणाम प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए नियमों का नियमित पालन करें:
1. Krak O Stone Capsule (कैप्सूल)
सुबह नाश्ता करने के आधे घंटे (30 मिनट) बाद हल्के गुनगुने पानी से 1-2 कैप्सूल लें।
(Take 1-2 capsules 30 minutes after morning breakfast with lukewarm water.)
2. Amritshahi Urocare Powder (पाउडर)
सुबह और शाम खाना खाने के बाद हल्के गुनगुने पानी से लें।
(Take twice daily after meals with lukewarm water.)
3. Krak O Stone Syrup (सिरप)
आधा चम्मच सिरप को 1 कप गर्म पानी में मिलाकर रात में खाना खाने के आधे घंटे बाद लें।
(Mix 1/2 tsp syrup in 1 cup warm water and take 30 minutes after dinner at night.)
💡 विशेष सलाह: दवा के कोर्स के दौरान दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर गुनगुना या ताजा पानी अवश्य पिएं। टमाटर के बीज, पालक, अधिक नमक और कोल्ड ड्रिंक्स का परहेज करें।
पथ्य और अपथ्य (आहार, दिनचर्या व परहेज)
आयुर्वेद के अनुसार किसी भी औषधि का शत-प्रतिशत प्रभाव तभी मिलता है जब सही खान-पान (पथ्य) का पालन और हानिकारक चीजों (अपथ्य) का त्याग किया जाए:
- भरपूर जलपान: दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर हल्का गुनगुना या ताजा पानी पिएं।
- कुलथी की दाल: कुलथी की दाल का पानी/सूप अश्मरीभेदन (पथरी गलाने) में अत्यंत गुणकारी है।
- जौ व नारियल पानी: जौ का काढ़ा (Barley Water) और ताजा नारियल पानी प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) हैं।
- नींबू व सिट्रस फल: नींबू पानी में सिट्रेट होता है जो कैल्शियम क्रिस्टल्स को आपस में जुड़ने नहीं देता।
- जल-युक्त फल व सब्जियां: खीरा, तरबूज, अनानास, पेठा और लौकी का अधिक सेवन करें।
- छाछ (मट्ठा): भुना जीरा और सेंधा नमक मिलाकर ताजी छाछ का दोपहर में सेवन करें।
- बीज वाली सब्जियां: टमाटर, बैंगन और शिमला मिर्च (विशेषकर इनके बीजों) से पूर्ण परहेज रखें।
- उच्च ऑक्सालेट खाद्य: पालक, चौलाई, चोकर, चॉकलेट और बीटरूट का सेवन न करें।
- अधिक नमक व जंक फूड: अत्यधिक नमक, पापड़, डिब्बाबंद अचार और प्रोसेस्ड चिप्स/कुरकुरे न खाएं।
- सोडा व कैफीन: कोल्ड ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, ज्यादा चाय और कॉफी से बचें।
- रेड मीट व मांसाहार: लाल मांस, समुद्री भोजन और अत्यधिक प्यूरीन युक्त भारी भोजन न करें।
- नशा व धूम्रपान: शराब (अल्कोहल) और बीड़ी-सिगरेट से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
सावधानियाँ एवं डॉक्टरी परामर्श निर्देश (Precautions)
निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन न करें:
- गर्भवती महिलाएँ एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ।
- जिनकी पिछले 1 वर्ष के भीतर कोई भी छोटी या बड़ी सर्जरी (ऑपरेशन) हुई हो।
- टीबी (Tuberculosis) या अस्थमा (दमा) से पीड़ित व्यक्ति।
- जिन्हें मिर्गी या दौरे पड़ने की समस्या हो।
- कैंसर से पीड़ित व्यक्ति या जिनका कैंसर का इलाज चल रहा हो।
- किडनी फेलियर, डायलिसिस या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति।
- जो पहले से किसी अन्य गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हों या जिन्हें किसी दवा अथवा घटक से एलर्जी हो।
- बच्चों, बुजुर्गों या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्ति।
महत्वपूर्ण सूचना: किसी भी आयुर्वेदिक दवा का सेवन शुरू करने से पहले उसकी सामग्री एवं सेवन विधि की जानकारी लें। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित दवाएँ ले रहे हैं या आपकी हाल ही में सर्जरी हुई है, तो पहले योग्य एवं पंजीकृत डॉक्टर से परामर्श करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनी चल रही एलोपैथिक दवाएँ बंद न करें।